शायरी

मुक्कमल तुम भी नहीं थे,
मुक्कमल हम भी नहीं थे,
मुक्कमल ईश्क़ भी नहीं था,
मुक्कमल थे तो फ़क़त दावे ।

हेमा चंदानी 'अंजुलि'

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Anjuli