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मान बेचने निकला है,ईमान बेचने निकला है, सिक्कों की मृगतृष्णा में,इंसान बेचने निकला है। हेमा चंदानी 'अंजुलि'

साहित्य : शायरी

साहित्य : शायरी : मुक्कमल तुम भी नहीं थे, मुक्कमल हम भी नहीं थे, मुक्कमल ईश्क़ भी नहीं था, मुक्कमल थे तो फ़क़त दावे । हेमा चंदानी 'अंजुलि'

साहित्य : बचपन तो कहानी था,हक़ीक़त तो बुढ़ापा है।हेमा चंदानी...

साहित्य : बचपन तो कहानी था, हक़ीक़त तो बुढ़ापा है। हेमा चंदानी... : बचपन तो कहानी था, हक़ीक़त तो बुढ़ापा है। हेमा चंदानी 'अंजुलि'

साहित्य : उसके दिल में अँधेरा था,घर जला कर भी रोशन न हो सका...

साहित्य : उसके दिल में अँधेरा था, घर जला कर भी रोशन न हो सका... : उसके दिल में अँधेरा था, घर जला कर भी रोशन न हो सका। हेमा चंदानी 'अंजुलि'

साहित्य : बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की,न तो बन्धनों में ...

साहित्य : बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की, न तो बन्धनों में ... : बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की, न तो बन्धनों में सुकून है,और न ही आज़ादी में। हेमा चंदानी 'अंजुलि'

साहित्य : कुछ अँधेरे हमारे हिस्से भी थेकुछ दिए हमने भी जलाए...

साहित्य : कुछ अँधेरे हमारे हिस्से भी थे कुछ दिए हमने भी जलाए... : कुछ अँधेरे हमारे हिस्से भी थे कुछ दिए हमने भी जलाए थे। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
कुछ अँधेरे हमारे हिस्से भी थे कुछ दिए हमने भी जलाए थे। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की, न तो बन्धनों में सुकून है,और न ही आज़ादी में। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
उसके दिल में अँधेरा था, घर जला कर भी रोशन न हो सका। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
बचपन तो कहानी था, हक़ीक़त तो बुढ़ापा है। हेमा चंदानी 'अंजुलि'