' अंजुलि' अंजुलि मेरे हृदय कि अंजुली जिसमें भरकर ढेर सारा प्रेम कर देना चाहती हूँ तुम्हे अर्पण बिना किसी शंका , बिना किसी प्रश्न के , नही जानती कि होगा स्वीकृत या अस्वीकृत तुम्हारे हृदय में जगह पायेगा या धरती की गोद में समा जायेगा मैं तो बस इतना जानती हूँ कि अंजुली की नियति केवल अर्पण है.... और प्रेम की समर्पण...... हेमा ' अंजुलि'
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