साहित्य : बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की,न तो बन्धनों में ...
साहित्य : बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की,
न तो बन्धनों में ...: बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की, न तो बन्धनों में सुकून है,और न ही आज़ादी में। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
न तो बन्धनों में ...: बड़ी अजीब सी फ़ितरत है रिश्तों की, न तो बन्धनों में सुकून है,और न ही आज़ादी में। हेमा चंदानी 'अंजुलि'
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