मुझे जीने दो.....
तुमने कहा,
तुमने कहा,
मैं बदल गई हूँ.....
मैं बदल गई हूँ.....
बदली नही हूँ मैं,
बदली नही हूँ मैं,
बस भीतर से बाहर आ गई हूँ.....
बस भीतर से बाहर आ गई हूँ.....
बाहर कितना उजाला है ना..
बाहर कितना उजाला है ना..
चमकता नीला आसमान,खुली हवा..
चमकता नीला आसमान,खुली हवा..
सच उड़ने को मन करता है...
सच उड़ने को मन करता है...
कहीं तुम मुझे फिर से
कहीं तुम मुझे फिर से
भीतर तो नही धकेल दोगे ना...?
भीतर तो नही धकेल दोगे ना...?
मैं अब भीतर नही जाना चाहती
मैं अब भीतर नही जाना चाहती
कितनी घुटन है वहां
कितनी घुटन है वहां
हर वक्त शाम का धुंधलका सा छाया रहता है..
हर वक्त शाम का धुंधलका सा छाया रहता है..
हर जगह एक खामोश सी बेबसी फैली रहती है...
हर जगह एक खामोश सी बेबसी फैली रहती है...
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हवाएं भी आने से कतराती हों जहां
हवाएं भी आने से कतराती हों जहां
वहां कोई केसै जी सकता है भला..
वहां कोई केसै जी सकता है भला..
इसीलिए अब तुम मुझे
इसीलिए अब तुम मुझे
बाहर ही रहने दो...
बाहर ही रहने दो...
और
जैसे तुम जी रहे हो
और
वैसे ही मुझे भी जीने दो.....
वैसे ही मुझे भी जीने दो.....
हेमा 'अंजुलि'
हेमा 'अंजुलि'

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