गर मिलता जो साथ तुम्हारा
















गर मिलता जो साथ तुम्हारा

तो कुछ लम्हे मैं भी जी लेती.....

.
तुम जो कहते तो


बटोर लाती तुम्हारे लिए सूरज से उजाले


चुरा लेती फूलों से ख़ुशबू 


ले लेती उधार चंदा से चाँदनी


माँग लेती धरती से एक टुकड़ा आँगन


और सजा देती उसे अपने प्रेम से,


बसा लेती मैं भी एक दुनिया ,


गर मिलता जो साथ तुम्हारा....…

हेमा 'अंजुली'




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